कोरबा :-

दुर्गम पहाड़ी मार्ग पार कर पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने श्रद्धा से ग्रहण किया प्रसाद

शारदीय नवरात्रि की महानवमी के पावन अवसर पर चैतुरगढ़ स्थित प्रसिद्ध मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर में शांति देवी मेमोरियल, कोरबा के तत्वावधान में भव्य भंडारे का आयोजन किया गया। घने पहाड़ी एवं वन क्षेत्र में स्थित मंदिर तक पहुंचने का मार्ग अत्यंत दुर्गम और कई स्थानों पर जोखिमपूर्ण होने के बावजूद हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन एवं आशीर्वाद के लिए चैतुरगढ़ पहुंचे और भंडारे में श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल अपने परिवार के साथ, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस के पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने मां महिषासुर मर्दिनी के दर्शन कर पूजा-अर्चना की तथा भंडारे में शामिल होकर प्रसाद ग्रहण किया।


चैतुरगढ़ की भौगोलिक स्थिति और दुर्गम पहाड़ी मार्ग को देखते हुए इतने बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन अपने आप में सेवा और समर्पण का कार्य है। आयोजन स्थल तक खाद्य सामग्री, आवश्यक संसाधन और व्यवस्थाएं पहुंचाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद आयोजकों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थित रूप से भंडारे की व्यवस्था की गई, जिसका लाभ हजारों श्रद्धालुओं ने उठाया। इस अवसर पर डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि नवरात्रि के दौरान माता के दरबार में सेवा करना स्वयं में सौभाग्य का विषय है। चैतुरगढ़ की पावन भूमि सदियों से श्रद्धा और आस्था का केंद्र रही है। दुर्गम परिस्थितियों के बीच श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था करना केवल आयोजन नहीं, बल्कि मां की सेवा और जनसेवा की भावना का प्रतीक है।
पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि चैतुरगढ़ पहुंचना जितना कठिन है, यहां इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था करना उससे कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण कार्य है। महानवमी के अवसर पर मां महिषासुर मर्दिनी के दरबार में आने वाले श्रद्धालुओं को प्रेम, श्रद्धा और सेवा भाव से भोजन कराना हमारी धार्मिक एवं सामाजिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि माता के दरबार में ग्रहण किया गया प्रसाद केवल भोजन नहीं, बल्कि आस्था और सेवा का प्रसाद है। उन्होंने आयोजन से जुड़े सभी लोगों को इस पुनीत कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं।
सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने कहा कि नवरात्रि के पावन अवसर पर मां के दरबार में श्रद्धालुओं की सेवा करने का अवसर मिलना अत्यंत पुण्य का कार्य है। चैतुरगढ़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में हजारों श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था करना आयोजकों के समर्पण और सेवाभाव को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि माता रानी सभी श्रद्धालुओं के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली प्रदान करें तथा क्षेत्र में आपसी प्रेम और भाईचारा सदैव बना रहे।
भंडारे में शामिल श्रद्धालुओं ने भी आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि कठिन और दुर्गम मार्ग से चैतुरगढ़ पहुंचने के बाद माता के दर्शन के साथ ही प्रेमपूर्वक उपलब्ध कराया गया भोग-प्रसाद उनके लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव रहा। श्रद्धालुओं ने आयोजकों को आशीर्वाद देते हुए मां महिषासुर मर्दिनी से उनके सुख-समृद्धि एवं मंगल की कामना की।
महानवमी के इस पावन अवसर पर पूरा चैतुरगढ़ “जय माता दी” के जयघोष से गूंजता रहा और श्रद्धा, भक्ति एवं सेवा का अद्भुत वातावरण बना रहा।