कोरबा :-

25 मई 2013 छत्तीशगढ़ प्रदेश एवं प्रदेश कांग्रेस के लिए एक काला दिन, जब परिवर्तन यात्रा के दौरान झिरम घाटी मे धाक लगाकर बैठे नक्सलियों ने नरसंघहार को अंजाम देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं सहित कुल 32 नेताओं पर कहर बरपाया था, जिसमे 32 लोगों की जान चली गई थी। उक्त घटना की जांच एन.आई.ए को सौंपा गया था, जिसपर एन.आई.ए ने 05 सितम्बर 26 को हुए 11 आरोपियों को दोषी पाया जिसमे 01 आरोपी की पहले ही मृत्यु हो चुकी है,बाकि10 आरोपियों की सजा क्या होगी उस पर विशेष कोर्ट द्वारा 16सितम्बर को जारी किया जाएगा। रिपोर्ट आने के पश्चात प्रदेश कांग्रेस द्वारा इसका विरोध किया जा रहा है। इसी विषय को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा कांग्रेस कार्यलए मे पत्रकार वार्ता किया गया। पत्रकार वार्ता मे पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने पत्रकारों को सम्बोधित करते हुए कहा के एन.आई.ए द्वारा जो रिपोर्ट पेस की गई वह अपूर्ण है। कोर्ट के फैसले का आदर करते है क्योंकि अदालत ने वही फैसला दिया जो तथ्य एन.आई.ए द्वारा रखे गए थे, जिसके कारण जो दस आरोपियों के नाम सामने आये है वें छोटे नक्सली है, जबकि इतनी बड़ी घटना बिना बड़े नक्सली नेताओं के संभव नही था।
उक्त रिपोर्ट मे उन आरोपियों के नाम शामिल नही है,जबकि प्रारम्भिक जांच मे एन.आई.ए ने बड़े नक्सली नेताओं के नाम एफ.आई.आर मे शामिल किया था। उन्होंने कहा के 2018 से 2023 के दौरान प्रदेश मे जब कोंग्रेस की सरकार थी तब छत्तीशगढ़ पुलिस की एस.आई.टी का गठन किया गया तो एन.आई.ए ने प्रदेश स्तर पर जांच रोकने के लिए स्टे लेकर आ गए । वहीँ उन्होने कहा के झिरम मामले मे भाजपा की तत्कालीन सरकार ने जांच को रोकने या उसकी दिशा को भटकाने हर संभव प्रयास किया था। उन्होने आगे बताया के सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीशगढ़ पुलिस की एस.आई.टी को जांच के पक्ष मे फैसला दिया तो ढाई साल मे प्रदेश के साय सरकार ने जांच नही सुरु की। इससे साफ हो जाता है के भाजपा नही चाहती की झिरम का सच सामने आए। उन्होंने प्रदेश सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा के 25 मई 2013 मे हुए घटना के वक़्त तत्कालीन भाजपा सरकार व नक्सलियों मे सांठ-गाँठ थी और फैसला आने के बाद बड़े नक्सली लीडरों का नाम न आना इसका प्रमाण है। जिला कांग्रेस कमिटी ने पत्रकार वार्ता मे फैसला को आधा अधूरा न्याय बताते हुए मांग रखी है के सरकार या एन.आई.ए उक्त प्रश्न 1. परिवर्तन यात्रा के दौरान सुरक्षा किसके कहने पर हटाई गई ?
2.यात्रा मार्ग को किसने और क्यों बदलवाया ? 3. हमले की योजना किसके द्वारा बनाई गई ? 4. झिरम हमले मे शामिल बड़े नक्सलियों ने जब जब समर्पण किया एन.आई.ए ने कितनो से पूछताछ किया ? 5. एन.आई.ए ने छत्तीशगढ़ सरकार की पुलिस द्वारा गठित एस.आई.टी को जांच से क्यों रोका ? 6. क्यों जांच मे बड़े नक्सलियों के नाम नही ? आदि प्रश्नों को जांच रिपोर्ट मे शामिल करे,तभी इतनी बड़े घटना का सच्चाई सामने आ सकेगा। साथ ही जिसने भी झिरम घाटी के मामले को लेकर साजिश रची थी उन सभी आरोपियों को बक्शा न जाए एवं उनके नामो को सामने लाया जाए। जिससे उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। पत्रकारवार्ता मे भजपा का कहना है के यह सम्पूर्ण कांग्रेस का आतंरिक मामला है पूछे जाने पर, श्री अग्रवाल ने कहा के भाजपा को चाहिए के वें उन नामो को उजागर करे जो साजिश मे शामिल थे। तो क्या कांग्रेस के मांगो पर एक बार पुनः होगा विचार ? या फिर झिरम मामला अन सुलझी इतिहास के पन्नों पर सिमट कर रह जाएगा।