कोरबा :

उत्सर्जित राखड़ का युक्तायुक्त एवं नियमानुसार सावधानिया उपेक्षित

कोरबा जिले मे स्थित सार्वजनिक क्षेत्र के वृहद उपक्रम एनटीपीसी के कोरबा-पश्चिम स्थापित कोरबा वृहद ताप विद्युत संयंत्र में प्रतिदिन हजारो टन कोयला का उपयोग किया जा रहा हैं। जिसके उपयोग के पश्चात उत्सर्जित राखड़ को प्रदुषण मंडल के निर्देशानुसार युक्तायुक्त नियमानुसार उसका उत्सर्जित किया जाना हैं, जिससे राख़ से होने वाले दुष्प्रभाव से आस पास के रहवासियों को गंभीर बिमारियों से बचाया जा सके। जिसकेव लिये नियमानुसार राखड़ को पानी के सहारे मोटे-मोटे पाइपों के माध्यम से राखड़ बांध तक पहुंचाया जाना हैं। साथ ही नियमानुसार बांध की तटीय दीवार की ऊचाई भी सुनिश्चीत की गई हैं। इसके अलावा एकत्रित राख के ऊपर सदैव पानी की मोटी परत होनी चाहिए, जिससे राखड़ हवा के साथ उड़े नही । यदि थोड़ी बहुत राखड़ उड़ी भी तो वह बांध की तटीय दीवारों से बाहर न निकल पाए। लेकिन एनटीपीसी प्रबंधन के द्वारा सतत की जा रही अनदेखी ओर लापरवाही के कारण बांध के ऊपर जमा राख उड़कर आसपास स्तिथ घणी आबादी मे हवा के साथ घुलकर लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं और वहा बसे विस्थापित परिवारों के साथ आसपास की ही नहीं बल्कि दूर-दूर तक की आबादी प्रभावित हो रहें हैं। इसी समस्या के निदान को लेकर आस पास के विस्थापित आंदोलनरत हैं। बता दें के जिले के एनटीपीसी धनरास राखड़ बांध से दो ग्राम पंचायत धनरास और छुरीखुर्द सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। इन ग्राम पंचायत के प्रभावित परिवारों को एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा राखड़ मे रहने पर प्रतिदिन 300 रुपए के हिसाब से मुआवजा देता है,या यूँ कहे यह एक तरह से राखड़ खाने की क्षतिपूर्ति है। धनरास के लोगों को पहली बार 20 दिन का मुआवजा दिया गया है, जिसमे 600 परिवारों को 36 लाख रुपए का भुगतान किया गया है जबकि लोगों ने 48 दिन का मुआवजा मांगा था। छुरीखुर्द पंचायत में तो 10 दिन का 650 परिवारों को 19 लाख 5 हजार मुआवजा दिया गया है जो एनटीपीसी के धनरास राखड़ बांध से महज 500 मीटर नीचे ही ग्राम मे बसें है। धनरास पंचायत अंतर्गत घमोटा, सलिहाभाठा और पुरेनाखार आश्रित ग्राम हैं। जहां 600 परिवार रहते हैं। इसी तरह छुरीखुर्द पंचायत में गांगपुर, उगई डुग्गू और झोरा आश्रित ग्राम हैं। यहां पर 650 परिवार रहते हैं। धनरास के ग्रामीण बताते हैं कि यहां नवंबर से जून तक राखड़ थोड़े सी हवा होने पर कभी भी उड़ता रहता है, जिसकी वजह से कई बार पका हुआ भोजन भी खराब हो जाता है। इसे लेकर ग्रामीणों ने 4 साल पहले बड़ा आंदोलन किया गया था,जिसके बाद एनटीपीसी प्रबंधन ने राखड़ उड़ने पर रोजाना 300 रुपए की दर से मुआवजा देने की सहमति दी, साथ यह भी तय किया है कि 10 दिन का ही मुआवजा मिलेगा एवं मुआवजा राशि का वितरण पंचायत के माध्यम से हि होता है।

शादी, दशगात्र आदि में राखड़ उड़ने पर मात्र 15 हजार का मुआवजा

जानकारी के अनुसार ग्राम धनरास और छुरीखुर्द पंचायत में शादी, सगाई एवं दशगात्र के दिन राखड़ उड़ जाए तो 15 हजार मुआवजा का प्रावधान है। इस साल ग्राम धनरास में बलवान सिंह, कैलाश कुमार, श्याम बाई, बिशीलाल महंत व मनमोहन भारिया को इसका मुआवजा दिया गया। ग्रामीणों ने बताया कार्यक्रम के दौरान राखड़ उड़ने से खाना खराब हो गया। 25 हजार से अधिक का नुकसान हुआ था,लेकिन मुआवजा मात्र 15 हजार ही मिला।

धूप निकलने के बाद उड़ते रहती हैं राखड़, प्रबंधन बेपरवाह 

ग्राम धनरास के ग्रामीणों का कहना है कि वर्षा ऋतू मे धूप निकलने के बाद राखड़ उड़ते रहता है, इससे खाना के साथ पानी भी प्रदूषित हो जाता है। रोज राख खाना पड़ रहा है, लेकिन मुआवजा 10 दिन का ही मिलता है, अतः एनटीपीसी प्रबंधन राखड़ उड़ने मे रोक लगाने पर गंभीरता दिखाने के बजाए , मुआवजा देने पर आश्रित है।

1250 लोगों को डेढ़ करोड़ का बांटा जा चुका हैं मुआवजा

एनटीपीसी प्रबंधन ने बताया की राखड़ उड़ने से प्रभावित गांव को 04 साल से दोनों पंचायत के 8 ग्रामो के लोगों को मुआवजा राशि दे रहा है, जिसमे दोनों पंचायतों में 1250 परिवार हैं । 04 साल में करीब डेढ़ करोड़ का मुआवजा बंट चुका है। छुरी खुर्द में इस साल अबतक 19 लाख 5 हजार का मुआवजा बंटा गया है।

मुआवजा की बाते कही गई पर 2020-21 के बाद मुआवजा नही दिया गया

जानकारी के अनुसार राखड़ डैम से पानी रिसाव के कारण दोनों ही पंचायत में 168 किसानों की फसल खराब होने पर, किसानों को 3 साल का एक साथ मुआवजा दिया जाता है। लेकिन बताया जा रहा हैं की 3 साल से मुआवजा नहीं मिला है। अंतिम बार 2020-21 तक का 36 लाख 80 हजार 574 रुपए का मुआवजा मिला था।

मुआवजा प्रकरण बनाकर भेजा गया हैं एनटीपीसी को : तहसीलदार राजेंद्र भारत

कोरबा जिले के दर्री तहसीलदार राजेंद्र भारत का इस मामले में कहना है कि फसल क्षति का मुआवजा प्रकरण बनाकर एनटीपीसी प्रबंधन को भेजा गया है,राशि मिलते ही भुगतान किया जाएगा।

मुआवजा वितरण कब होगा पूछकर ही बता पाऊंगी : एनटीपीसी जनसम्पर्क अधिकारी 

इस संबंध में एनटीपीसी जनसंपर्क अधिकारी सुश्री घोष से पूछा गया तो एनटीपीसी प्रबंधन की ओर से दिए गए उनके कथन को और भी अधिक अपरिपक्व एवं गैरजिम्मेदाराना ठहराते हुए आंदोलनरत भू-विस्थापित और भी अधिक आघातित हुए । उन्होंने बताया के जनसम्पर्क अधिकारी का व्यक्तव्य है की इस संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं हैं। उच्चअधीकारियों से इस संबंध में वार्तालाप करके ही कुछ बता पाऊंगी। भू-विस्थापितो ने यह भी जानकारी दी हैं की उन्होंने कहा हैं की एनटीपीसी के धनरास राखड़ बांध से उड़ने के मुआवजा संबंध में मुझे कोई जानकारी नहीं है।